Wednesday, July 20, 2011

* Mumbai terrorist attacks / कायर आतंकी हमले करते हैं और समर्थ सदा शांतिवार्ताएं !!

                 बम विस्फोट के तत्काल बाद लहुलुहान जनता पर        धमाकेदार बयानों का हमला हुआ । लोग पहले की अपेक्षा दूसरे हमले से ज्यादा घायल हुए और उनका ध्यान आतंकवदियों से कुछ देर के लिए हट गया । पहले हमलावर गायब हो गए और दूसरे सुर्खियों में आ गए, दोनों की इच्छा पूरी हुई । सुर्खियां लोकतंत्र के बाजार में बड़ी पूंजी है, चुनाव ज्यादा दूर नहीं हैं । नए सूट आदि सिलवा कर वे अब शांतिवार्ता के लिए तैयार होंगे । परिधान अच्छे और नए हों तो हमारा मन प्रसन्न और सामने वाला शांत  रहता है ।  शांतिवार्ता के पहले एक वातावरण बनाना पड़ता है । शांतिवार्ता करना मात्र कबूतर उड़ाना नहीं है सुबह सुबह , वातावरण बनाने  के लिए मुर्गे भी उड़ाना पड़ते हैं रात को । वे लोग धमकों से आतंक का वातावरण बनाते हैं और हम शांतिवार्ता करके चट-से उस पर पानी फेर देते हैं । शांतिवार्ता दिमाग का खेल है और दुनिया जानती है कि हमारे पास दिमाग है । हमने दुनिया को हिसाब लगाने के लिए शुन्य  दिया और खुद धीरे धीरे एक सौ इक्कीस करोड़ हो गए । एक धमाके में वे सौ-दो सौ मारते हैं जबकि हमारे यहां मात्र पांच मिनिट में दो सौ से ज्यादा आबादी बढ़ जाती है । हमारा सिद्धान्त है कि कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे तो तुरंत दूसरा गाल आगे कर दो । सरकार के पास अपना पक्ष मजबूत करने के लिए अब दो सौ बयालीस करोड स्वदेशी  गाल हैं, ‘मेड इन इंडिया’ । और क्या चाहिए अहिंसा समर्थक सरकार को ! राज की बात बतांए ? बिगड़े हुओं से बार बार शांतिवार्ता करो तो वे पागल हो जाते हैं और फिर अमेरिका जैसे म्यूनिसपेलिटी वाले रैबिज से बचाव के नाम पर उन्हें आसानी से मार भी देते हैं । हींग लगे न फिटकरी और रंग भी आए चोखा । अहिंसक के अहिंसक रहे और निबटा भी दिया । अपनी अपनी राजनीति है प्यारे । है कि नहीं ? 
            जनता को समझना होगा कि शांतिवार्ता हमारी सर्वाधिक महत्वपूर्ण विदेश नीति है । हमने युद्ध से ज्यादा शांतिवार्ताएं लड़ी हैं, अंदर भी और बाहर भी । सरकार एक बार शांतिवार्ता पर उतारू हो जाती है तो फिर अपने आप की भी नहीं सुनती है । अभी एक बाबा से शांतिवार्ता की, मात्र दो दिन में उनकी उमर दस साल बढ़ गई और समर्थक चौथाई  रह गए । इसके बाद सामने वाला हमले भले ही करता फिरे , युद्ध नहीं कर सकता । दरअसल इसमें हमारी कूटनीति  है, सीमापार वाले शांतिवार्ताएं करना चाहते नहीं, क्योंकि उन्हें वार्ता करना आती नहीं है और हम उन्हें शांतिवार्ता के मोर्चे पर बुला कर बार बार पटकनी मारते हैं । अभी देखो, इधर धमाके हुए उधर फट्ट-से हमने चेतावनी दे दी कि शांतिवार्ता पर धमाकों का कोई असर नहीं होगा । सुनते ही उनको सांप सूंघ गया होगा । पिछली बार उन्होंने छाती ठोक के सबूत मांगे थे , हमने ढ़ेर सारे दे दिए, आज तक उसकी छानबीन में लगे हैं और माथा ठोक रहे हैं । 
कायर हमेशा  आतंकी हमले करते हैं और समर्थ सदा शांतिवार्ताएं । जाहिर है कि हम समर्थ हैं ।

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